चंदापुर में आंगनबाड़ी का अता-पता नहीं, ग्रामीण बोले- कौन है कार्यकर्ता, हमें ही नहीं मालूम
.ग्रामीणों का सवालकृकेंद्र किसके भरोसे चल रहा है, कार्यकर्ता कौन है यह तक नहीं पता; सीडीपीओ ने फोन नहीं उठाया

दैनिक बुद्ध का संदेश
खेसरहा। विकासखंड खेसरहा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कठमोरवा के चंदापुर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में आंगनबाड़ी केंद्र होने के बावजूद किसी भी पात्र व्यक्ति को अब तक किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिला है। हालात इतने बदतर बताए जा रहे हैं कि ग्रामीणों को यह तक नहीं पता कि उनके गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कौन हैं और केंद्र वास्तव में कहां और किस तरह संचालित होता है। रामवृक्ष, सभाराम, राममिलन, तूफानी, परवेश, भोला गुप्ता समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाली सुविधाएं गांव में दिखाई नहीं देतीं। बच्चों और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिलने की बात तो दूर, ग्रामीणों को केंद्र की नियमित गतिविधियों की जानकारी तक नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के गांव में नहीं आने से सरकारी व्यवस्था का लाभ जमीन पर पहुंच ही नहीं रहा है। सवाल सिस्टम से है… निगरानी कौन कर रहा? मामला सिर्फ एक केंद्र के संचालन का नहीं, बल्कि उस पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, जिसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित जांच और लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि चंदापुर के ग्रामीणों के आरोप सही हैं और किसी पात्र व्यक्ति को लाभ नहीं मिला, तो फिर सवाल उठना लाजिमी है कि केंद्र की उपस्थिति और गतिविधियों की जांच किस स्तर पर हो रही है। क्या विभागीय अभिलेखों में केंद्र नियमित रूप से संचालित दिख रहा है? क्या लाभार्थियों की सूची तैयार की गई है? यदि सूची में लाभ वितरण दर्ज है तो उसका लाभ वास्तव में किसे मिला? और यदि लाभ नहीं पहुंचा तो जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए सीडीपीओ मनोज शुक्ला से संपर्क करने का प्रयास किया गया। मोबाइल पर काफी देर तक घंटी जाती रही, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में ग्रामीणों के आरोपों पर विभागीय अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आ सका। अब देखने वाली बात होगी कि क्या विभाग चंदापुर के आंगनबाड़ी केंद्र की जमीनी जांच कराएगा या फिर यह मामला भी कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाएगा। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मौके पर जांच कराकर केंद्र के संचालन, कार्यकर्ता की उपस्थिति और लाभार्थियों को दिए गए लाभ का सत्यापन कराने की मांग की है।



