सांसद ने लोकसभा में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के विलय के सम्बन्ध में वित्त मंत्रालय से मांगी जानकारी

सिद्धार्थनगर। लोकसभा में सोमवार को लोकप्रिय सांसद जगदम्बिका पाल ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के विलय के सम्बन्ध में वित्त मंत्रालय से जानकारी मांगी। उनका प्रश्न तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर केन्द्रित था, जो निम्न थे – (1) क्या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विलय से उनकी परिचालन दक्षता और वित्तीय स्थिरता में सुधार हुआ है? (2) इस विलय के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए समय-सीमा और रूपरेखा क्या है? (3) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों और ग्रामीण ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए क्या उपाय किये गये हैं? इसके जवाब में वित्त मंत्री ने सदन को सूचित किया कि भारत सरकार ने परिचालन व्यवहार्यता बढ़ाने और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं का लाभ उठाने के लिए 2005-06 से आरआरबी के चरणबद्ध समेकन का प्रयास किया है।
वित्त मंत्री ने विलय के चार चरणों की रूपरेखा प्रस्तुत की
चरण 1 (2005-2010) – एक राज्य के भीतर एक ही प्रायोजक बैंक के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलय किया गया, जिससे उनकी संख्या 196 से घटकर 82 हो गई।चरण 2 (2012-2014) – प्रायोजक बैंकों में और अधिक एकीकरण से यह संख्या घटकर 56 हो गई।चरण 3 (2019-2021) – कमज़ोर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का मजबूत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के साथ विलय किया गया, जिससे उनकी संख्या घटकर 43 हो गई। चरण 4 (2025) – श्एक राज्य-एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकश् के सिद्धान्त के आधार पर 5 अप्रैल, 2025 की एक सरकारी अधिसूचना के माध्यम से 1 मई 2025 से प्रभावी 26 राज्यों और 2 केन्द्र शासित प्रदेशों में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या घटाकर 28 कर दी गई। 2021 के नाबार्ड अध्ययन (रिपोर्ट ऑन ट्रेण्ड एण्ड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2020-21 में प्रकाशित) का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि समामेलन से आरआरबी की व्यवहार्यता, लाभप्रदता और पूंजी पर्याप्तता में निरन्तर सुधार हुआ है। लाभदायक आरआरबी की हिस्सेदारी बढ़ी, कुल परिसम्पत्तियों के प्रतिशत के रूप में संचित घाटे में कमी आई और उत्तोलन और आरक्षित-से-पूंजी अनुपात में सुधार हुआ। उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी (एसएलएमसी) और एक नेशनल लेवल प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (एनएलपीएमयू) की स्थापना की है। नाबार्ड ने एक राष्ट्रीय स्तर की स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है, जिसमें प्रत्येक हस्तान्तरित आरआरबी में अमलगमेशन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एपीएमयू), संचालन समितियों और कार्यात्मक समितियों के गठन को अनिवार्य किया गया है। कर्मचारियों और ग्रामीण ग्राहकों के हितों की रक्षा की जा रही है। विलय अधिसूचना कर्मचारियों के पारिश्रमिक और सेवा शर्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और वरिष्ठता नाबार्ड के स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार निर्धारित की जाती है। ग्राहकों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने संचार अभियान शुरू किये हैं। जागरूकता बैठकें आयोजित की हैं और शिकायतों के समाधान के लिए कॉल सेन्टर स्थापित किये हैं। विलय के बाद भी सभी शाखाएँ चालू रहेंगी, जिससे निर्बाध बैंकिंग सेवाएँ सुनिश्चित होंगी।



